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कृष्णगाथा.…..

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                                                                                                                                       कृष्णगाथा......... बंगाल की गलियां गूंज रही हैं। महामंत्र के अनंत आह्लाद से गूंज रही हैं। चैतन्य नाच रहे हैं। अकेले नहीं, साथ में पूरा जंगल नाच रहा है। मृदंग, झांझ, मंजीरे हर वाद्य पर वहीं नाम, वहीं रट... राजस्थान में दरस दीवानी बनकर मीरा डोल रही है। महलों के ठाठ-बाट छोड़ सांवलिया वैद को खोज रही है गली-गली। तमिल में आलवार और अंडाल, कन्नड़ में अक्क और माधवाचार्य, नरसी गुजराती में, विद्यापति मैथली में, जयदेव संस्कृत में, शांगदास डोगरी में और ब्रजभाषा में अष्टछाप के कवि गा रहे हैं। उसी के गीत, उसी की तान, उसी के राग और हरिद...